299+ Bewafa Shayari – 299 से भी ज्यादा बेवफा शायरी हिन्दी में !

आप बेवफा होंगे सोचा ही नहीं था
आप भी कभी खफा होंगे सोचा नहीं था
जो गीत लिखे थे कभी प्यार पर तेरे
वही गीत रुसवा होंगे सोचा ही नहीं था

 

बेवफायी का मौसम भी
अब यहाँ आने लगा है
वो फिर से किसी और को
देख कर मुस्कुराने लगा है

 

टूटा दिल तो गम कैसा
वो चल दिये तो सितम कैसा
मन भरा यार बदले
बेवफा हुए साफ
तो फिर इश्क का भ्रम कैसा

 

कौन कहता है हम उसके बिना मर जायेंगे
हम तो दरिया है समंदर में उतर जायेंगे
वो तरस जायेंगे प्यार की एक बूँद के लिए
हम तो बादल है प्यार के
कहीं और बरस जायेंगे…

 

भले किसी ग़ैर की जागीर थी वो
पर मेरे ख्वाबों की तस्वीर थी वो
मुझे मिलती तो कैसी मिलती…
किसी और के हिस्से की तकदीर थी वो

 

हमें न मोहब्बत मिली न प्यार मिला
हम को जो भी मिला बेवफा यार मिला
अपनी तो बन गई तमाशा ज़िन्दगी
हर कोई मकसद का तलबगार मिला

 

पहले ज़िन्दगी छीन ली मुझसे
अब मेरी मौत का वो फायदा उठाती है
मेरी कब्र पे फूल चढाने के बहाने
वो किसी और से मिलने आती है

 

मेरी तलाश का है जुर्म
या मेरी वफा का क़सूर
जो दिल के करीब आया
वही बेवफा निकला

 

पहले इश्क फिर धोखा फिर बेवफ़ाई
बड़ी तरकीब से एक शख्स ने तबाह किया

 

तेरी चौखट से सिर उठाऊं तो बेवफा कहना
तेरे सिवा किसी और को चाहूँ तो बेवफा कहना
मेरी वफाओं पे शक है तो खंजर उठा लेना
मैं शौक से मर ना जाऊं तो बेवफा कहना

 

उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है

 

कैसे मिलेंगे हमें चाहने वाले बताइये
दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह
वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए
सजाएं मिली हमें गुनहगार की तरह

 

ढूंढ़ तो लेते अपने प्यार को हम
शहर में भीड़ इतनी भी न थी
पर रोक दी तलाश हमने
क्योंकि वो खोये नहीं बदल गए थे

 

नज़ारे तो बदलेंगे ही ये तो कुदरत है
अफ़सोस तो हमें तेरे बदलने का हुआ है

 

मोहब्बत से रिहा होना ज़रूरी हो गया है
मेरा तुझसे जुदा होना ज़रूरी हो गया है
वफ़ा के तजुर्बे करते हुए तो उम्र गुजरी
ज़रा सा बेवफा होना ज़रूरी हो गया है

 

दिल के दरिया में धड़कन की कश्ती है
ख़्वाबों की दुनिया में यादों की बस्ती है
मोहब्बत के बाजार में चाहत का सौदा है
वफ़ा की कीमत से तो बेवफाई सस्ती है

 

अपने तजुर्बे की आज़माइश की ज़िद थी
वर्ना हमको था मालूम कि तुम बेवफा हो जाओगे

 

कभी जो हम से प्यार बेशुमार करते थे
कभी जो हम पर जान निसार करते थे
भरी महफ़िल में हमको बेवफा कहते हैं
जो खुद से ज़्यादा हमपर ऐतबार करते थे

 

ये चिराग-ए-जान भी अजीब है
कि जला हुआ है अभी तलक
उसकी बेवफाई की आँधियाँ तो
कभी की आ के गुजर गईं

 

ये उनकी मोहब्बत का नया दौर है
जहाँ कल मैं था आज कोई और है

 

जो कहते थे हमसे हैं तेरे सनम
वो दगा दे गए देखते देखते

 

देते मोहब्बत का इनाम क्या
वो सजा दे गए देखते देखते

 

सोचता हूँ कि वो कितने मासूम थे
जो बेवफा हो गए देखते देखते

 

न रहा कर उदास ऐ दिल
किसी बेवफा की याद में
वो खुश है अपनी दुनिया में
तेरा सबकुछ उजाड़ के

 

किस-किस को तू खुदा बनाएगी
किस-किस की तू हसरतें मिटाएगी
कितने ही परदे डाल ले गुनाहों पे
बेवफा तू बेवफा ही नजर आएगी

 

ट्रैफिक सिग्नल पर आज उसकी याद आ गई
रंग उसने भी अपना कुछ इसी तरह बदला था

 

बेवफा से दिल लगा लिया नादान थे हम
गलती हमसे हुई क्योंकि इंसान थे हम
आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती है
कुछ समय पहले उनकी जान थे हम

 

गर हमें तेरी बदनामियों का डर न होता
न तू वेवफा कहती… न मैं वेवफा होता

 

मैंने कुछ इस तरह से खुद को संभाला है
तुझे भुलाने को दुनिया का भरम पाला है
अब किसी से मुहब्बत मैं कर नहीं पाता
इसी सांचे में एक बेवफा ने मुझे ढाला है

 

आज कतरा के गुजरते हुए पाया है तझे
बेवफाई का हुनर किसने सिखाया है तुझे

 

लिख-लिख कर मिटा दिए
तेरी बेवफाई के गीत
किया करती थी
तू भी वफ़ा एक ज़माने में

 

हसीं चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं
इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं​
महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश​
जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है

 

उसके तर्क-ए-मोहब्बत का सबब होगा कोई
जी नहीं मानता कि वो बेवफ़ा पहले से था

 

मुझे तू अपना बना या न बना तेरी खुशी
तू ज़माने में मेरे नाम से बदनाम तो है

 

वो जमाने में यूँ ही बेवफ़ा मशहूर हो गये दोस्त
हजारों चाहने वाले थे किस-किस से वफ़ा करते

 

कसम दी थी उसने कभी न रोने की मुझे
यही वजह है कि आज भी मुस्कुराता हूँ

 

हर काम किया मैंने उसकी खुशी के लिए
तब भी जाने क्यों बेवफा कहलाता हूँ

 

मुझे इश्क है बस तुमसे नाम बेवफा मत देना
गैर जान कर मुझे इल्जाम बेवजह मत देना
जो दिया है तुमने वो दर्द हम सह लेंगे मगर
किसी और को अपने प्यार की सजा मत देना

 

हर रात उसको इस तरह से भुलाता हूँ
दर्द को सीने में दबा के सो जाता हूँ

 

सर्द हवाएँ जब भी चलती हैं रात में
हाथ सेंकने को अपना ही घर जलाता हूँ

 

 

बेवफाई उसकी दिल से मिटा के आया हूँ
ख़त भी उसके पानी में बहा के आया हूँ
कोई पढ़ न ले उस बेवफा की यादों को
इसलिए पानी में भी आग लगा कर आया हूँ

 

तेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी
बेवफा मैंने तुझ को भुलाया नहीं अभी

 

 

हमने चाहा था जिसे उसे दिल से भुलाया न गया
जख्म अपने दिल का लोगों से छुपाया न गया
बेवफाई के बाद भी प्यार करता है दिल उनसे
कि बेवफाई का इल्ज़ाम भी उस पर लगाया न गया

 

वो कहता है… कि मजबूरियां हैं बहुत…
साफ लफ़्ज़ों में खुद को बेवफा नहीं कहता

 

इक उम्र तक मैं जिसकी जरुरत बना रहा
फिर यूँ हुआ कि उस की जरुरत बदल गई

 

तेरे इश्क़ ने दिया सुकून इतना
कि तेरे बाद कोई अच्छा न लगे
तुझे करनी है बेवफाई तो इस अदा से कर
कि तेरे बाद कोई बेवफ़ा न लगे

 

​​​​दोस्त बनकर भी वो नहीं साथ निभानेवाला
वही अंदाज़ है उस ज़ालिम का ज़माने वाला

 

खुश हूँ कि मुझको जला के तुम हँसे तो सही
मेरे न सही… किसी के दिल में बसे तो सही

 

इकरार बदलते रहते है… इंकार बदलते रहते हैं
कुछ लोग यहाँ पर ऐसे है जो यार बदलते रहते हैं

 

वो बेवफा हर बात पे देता है परिंदों की मिसाल
साफ साफ नहीं कहता मेरा शहर छोड़ दो

 

जल-जल के दिल मेरा जलन से जल रहा
एक अश्क मेरे आँख में मुद्दत से पल रहा
जिसका मैं कर रहा हूँ घुट-घुट के इंतजार
वो बेवफा ना आई मेरा दम निकल रहा

 

एक बेवफा से प्यार का अंजाम देख लो
मैं खुद ही शर्मशार हूँ उससे गिला नहीं
अब कह रहे हैं मेरे जनाज़े पे बैठ कर
यूँ चुप हो जैसे हमसे कोई वास्ता नहीं

 

ऐ बेवफा तेरी बेवफ़ाई में दिल बेकरार ना करूँ
अगर तू कह दे तो तेरा इंतेज़ार ही ना करूँ
तू बेवफा है तो कुछ इस कदर बेवफ़ाई कर
कि तेरे बाद मैं किसी से प्यार ही ना करूँ

 

चलो खेलें वही बाजी
जो पुराना खेल है तेरा
तू फिर से बेवफाई करना
मैं फिर आँसू बहाऊंगा

 

मुझे उसके आँचल का आशियाना न मिला
उसकी ज़ुल्फ़ों की छाँव का ठिकाना न मिला
कह दिया उसने मुझको ही बेवफा…
मुझे छोड़ने के लिए कोई बहाना न मिला

 

जिन फूलों को संवारा था
हमने अपनी मोहब्बत से
हुए खुशबू के काबिल तो
बस गैरों के लिए महके

 

अब भी तड़प रहा है तू उसकी याद में
उस बेवफा ने तेरे बाद कितने भुला दिए

 

नफरत को मोहब्बत की आँखों में देखा
बेरुखी को उनकी अदाओं में देखा
आँखें नम हुईं और मैं रो पड़ा…
जब अपने को गैरों की बाहों में देखा

 

इल्जाम न दे मुझको तूने ही सिखाई बेवफाई है
देकर के धोखा मुझे मुझको दी रुसवाई है
मोहब्बत में दिया जो तूने वही अब तू पाएगी
पछताना छोड़ दे तू भी औरों से धोखा खायेगी

 

मुझे शिकवा नहीं कुछ बेवफ़ाई का तेरी हरगिज़
गिला तो तब हो अगर तूने किसी से निभाई हो

 

न जाने क्या है..? उसकी उदास आंखों में
वो मुँह छुपा के भी जाये तो बेवफा न लगे

 

माना कि मोहब्बत की ये भी एक हकीकत है फिर भी
जितना तुम बदले हो उतना भी नहीं बदला जाता

 

छोड़ गए हमको वो अकेले ही राहों में
चल दिए रहने वो औरों की पनाहों में
शायद मेरी चाहत उन्हें रास नहीं आई
तभी तो सिमट गए वो गैर की बाहों में

 

ये नजर चुराने की आदत
आज भी नही बदली उनकी
कभी मेरे लिए जमाने से और
अब जमाने के लिए हमसे