Tehzeeb hafi shayari in hindi – तहज़ीब हफ़ी शायरी हिंदी में !

Hi…Shayari Peoples, अस्सलाम वालेकुम नाजरीन आज इस ब्लॉग में हम आपको आज के दौर के मशहूर हो मारूफ शायद तहजीब हाफी के जिंदगी के बारे में बताएंगे नाजरीन इस नौजवान शायर का असल नाम तहजीब उल हसन कलमी है और इसको आमतौर पर तहजीब हाफी के नाम से जाना जाता है यह खूबसूरत और जतिन शायरी लिखने वाला वह कमाल शायर पंजाब के शहर डेरा गाजी खान की तहसील taunsa sharif से है

नाजरीन तहजीब हाफी 5 दिसंबर 989 को तहसील taunsa sharif के गांव Retra में पैदा हुए उनके वालिद का नाम गुलाम हसन है जो के हैदराबाद में हाजिर शरिज मुलाजिम है तहजीब काफी के दो भाई हैं एक का नाम मोहम्मद वकास है जो कि उनसे बड़ा है और दूसरे भाई का नाम मोहम्मद नजम है जो कि उससे यानी तहजीब हाफी से छोटा है नाजरीन तहजीब हाफी ने तालीम से लेकर मैट्रिक तक अपने गाँव retra में हासिल की और फिर आला तालीम के लिए अपने वालिद के पास हैदराबाद चले गए

हैदराबाद में मेहरान यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग करने के बाद भागलपुर यूनिवर्सिटी से m.a. उर्दू में किया और वह आजकल लाहौर में मुकीम है नाजरीन तहजीब हांफ़ी की इतनी वीडियोस वायरल हुई है कि जिनका उर्दू अदब से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है वह भी तहजीब हांफ़ी की वीडियो शेयर कर रहे हैं नाजरीन तहजीब हांफ़ी की मशहूर जमाना गजल आप की खिदमत में पेश करना चाहूंगा

के किसे खबर है कि उम्र बस उस पर गौर करने पर कट रही है के ये उदासी हमारे जिस्मों से किस कदर लिपट रही है अजीब दुख है कि हम उसके होकर भी उसको छूने से डर रहे हैं अजीब दुख है कि हमारे हिस्से की आग औरो  में बट रही है वो जों पेड़ों के सूखने और सबल होने से क्या किसी को यह बेल शायद मुसीबत में ही है जो मुझसे लिपट रही है और मैं उसका बस यही झूठ सुनने को फोन करता हूं सुनो यहां कोई मसला है तुम्हारी आवाज कट रही है

नाजरीन तहजीब हाफी शायरी में एक जिदत दिखाई देती है आजकल के नौजवान तहजीब हांफ़ी को इसलिए भी इतना पसंद करते हैं कि उनको लगता है कि हालिया दौर में उनकी दिल की बात को शायराना अंदाज में तहजीब हांफ़ी काफी अच्छे तरीके से पेश करते हैं तहजीब हाफी साहब की शायरी में दिल का दुख और दर्द कूट कूट कर भरी हुई है नाजरीन सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की जानिब से तहजीब हाफी की शायरी सुनने और पसंद किए जाने के बाद उर्दू अदब के बड़े बड़े शायर मजबूर हो गए हैं कि उनकी मुल्की और गैर मुल्की की शायरी की बड़ी-बड़ी म्ह्फील्लो में तहजीब हाफी को मधु करें नाजरीन तहजीब हाफी लगातार दो-तीन महीनों से पाकिस्तान भर के university और अदब की मह्फीलो में उर्दू में बड़े-2 शायरों के साथ शिरकत कर रहे हैं और अपना कलाम पेश कर रहे हैं

यह कौन रहा बैठे हैं मुस्कुराते हैं मुसाफिरों को गलत रास्ता बताते हैं तेरे लगाए हुए जख्म क्यों नहीं भरते तेरे लगाए हुए जख्म क्यों नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ भी सूख जाते हैं उन्हें गीला था कि मैंने उन्हें नहीं चाहा उन्हें गिला था कि मैंने उन्हें नहीं चाहा यह जो अब मेरी तवज्जो से खौफ खाते हैं कोई तुम्हारा सफर पर गया तो पूछेंगे कोई तुम्हारा सफर पर गया तो पूछेंगे कि रेल गुजरे तो हम हाथ क्यों हिलाते हैं

जो तेरे साथ रहते हुए सोगवार हो,
लानत हो ऐसे शख़्स पे और बेशुमार हो..!!

अब इतनी देर भी ना लगा, ये हो ना कहीं
तू आ चुका हो और तेरा इंतज़ार हो..!!

मै फूल हूँ तो फिर तेरे बालो में क्यों नही हूँ
तू तीर है तो मेरे कलेजे के पार हो..!!

एक आस्तीन चढ़ाने की आदत को छोड़ कर
‘हाफ़ी’ तुम आदमी तो बहुत शानदार हो..!!

थोड़ा लिखा और ज़्यादा छोड़ दिया
आने वालों के लिए रास्ता छोड़ दिया..!!

लड़कियाँ इश्क़ में कितनी पागल होती हैं
फ़ोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया..!!

तुम क्या जानो उस दरिया पे क्या गुजरी
तुमने तो बस पानी भरना छोड़ दिया..!!

बस कानों पर हाथ रख लेते थोड़ी देर
और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिया..!!

ख्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझसे धोखा करती है..!!

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वगैरा करती है..!!

तहज़ीब हाफी शायरी हिंदी में

अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफे आ रहे हैं
के घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं..!!

हमे मिलना तो इन आबादियों से दूर मिलना
उससे कहना गए वक्तू में हम दरिया रहे हैं..!!

तुझे किस किस जगह पर अपने अंदर से निकालें
हम इस तस्वीर में भी तूझसे मिल के आ रहे हैं..!!

हजारों लोग उसको चाहते होंगे हमें क्या
के हम उस गीत में से अपना हिस्सा गा रहे हैं..!!

बुरे मौसम की कोई हद नहीं तहजीब हाफी
फिजा आई है और पिंजरों में पर मुरझा रहे हैं..!!

ख़ाक ही ख़ाक थी और ख़ाक भी क्या कुछ नहीं था
मैं जब आया तो मेरे घर की जगह कुछ नहीं था..!!

क्या करूं तुझसे ख़यानत नहीं कर सकता मैं
वरना उस आंख में मेरे लिए क्या कुछ नहीं था..!!

ये भी सच है मुझे कभी उसने कुछ ना कहा
ये भी सच है कि उस औरत से छुपा कुछ नहीं था..!!

अब वो मेरे ही किसी दोस्त की मनकूहा है
मै पलट जाता मगर पीछे बचा कुछ नहीं था..!!

ये किस तरह का ताल्लुक है आपका मेरे साथ
मुझे ही छोड़ के जाने का मशवरा मेरे साथ..!!

यही कहीं हमें रस्तों ने बद्दुआ दी थी
मगर मैं भुल गया और कौन था मेरे साथ..!!

वो झांकता नहीं खिड़की से दिन निकलता है
तुझे यकीन नहीं आ रहा तो आ मेरे साथ..!!

उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे
पलट के आए तो सबसे पहले तुझे मिलेंगे..!!

अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो
हम ऐसे बुजदिल भी पहले सफ में खड़े मिलेगे..!!

तुझे ये सड़के मेरे तवस्सुत से जानती हैं
तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे..!!

Tehzeeb Hafi Sher-o-Shayari

दीया जले – तहज़ीब हाफी शायरी हिंदी में
तारीकियों को आग लगे और दीया जले
ये रात बैन करती रहे और दीया जले..!!

उसकी जबान में इतना असर है कि निशब्द
वो रौशनी की बात करे और दीया जले..!!

तुम चाहते हो कि तुमसे बिछड़ के खुश रहूँ
यानि हवा भी चलती रहे और दीया जले..!!

क्या मुझसे भी अज़ीज़ है तुमको दीए की लौ
फिर तो मेरा मज़ार बने और दीया जले..!!

सूरज तो मेरी आँख से आगे की चीज़ है
मै चाहता हूँ शाम ढले और दीया जले..!!

धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना
अब वो मिलने आये तो उसको घर ठहराना..!!

तुमको दूर से देखते देखते गुज़र रही है
मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना..!!

शहज़ादी – तहज़ीब हाफी शायरी हिंदी में
तू ने क्या क़िन्दील जला दी शहज़ादी
सुर्ख़ हुई जाती है वादी शहज़ादी

शीश-महल को साफ़ किया तिरे कहने पर
आइनों से गर्द हटा दी शहज़ादी

अब तो ख़्वाब-कदे से बाहर पाँव रख
लौट गए हैं सब फ़रियादी शहज़ादी

तेरे ही कहने पर एक सिपाही ने
अपने घर को आग लगा दी शहज़ादी

मैं तेरे दुश्मन लश्कर का शहज़ादा
कैसे मुमकिन है ये शादी शहज़ादी

न नींद और न ख़्वाबों से आँख भरनी है
कि उस से हम ने तुझे देखने की करनी है..!!

किसी दरख़्त की हिद्दत में दिन गुज़ारना है
किसी चराग़ की छाँव में रात करनी है..!!

वो फूल और किसी शाख़ पर नहीं खिलता
वो ज़ुल्फ़ सिर्फ़ मिरे हाथ से सँवरनी है..!!

तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ
समुन्दरों से अकेले में बात करनी है..!!

हमारे गाँव का हर फूल मरने वाला है
अब उस गली से वो ख़ुश्बू नहीं गुज़रनी है..!!

तहज़ीब हाफी शायरी हिंदी में
गली से कोई भी गुज़रे तो चौंक उठता हूँ
नये मकान में खिड़की नहीं बनाऊंगा..!!

फरेब दे कर तेरा जिस्म जीत लूँ लेकिन
मैं पेड़ काट के कश्ती नहीं बनाऊंगा..!!

तुम्हें पता तो चले बेजबान चीज का दुःख
मैं अब चराग की लौ ही नहीं बनाऊंगा..!!

मैं दुश्मनों से जंग अगर जीत भी जाऊं
तो उनकी औरतें कैदी नहीं बनाऊंगा..!!

मैं एक फिल्म बनाऊंगा अपने सरवत पर
उसमें रेल की पटरी नहीं बनाऊंगा..!!

tehzeeb hafi poems in hindi

तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया
इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया

यूँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ
जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया

इतना मीठा था वो ग़ुस्से भरा लहजा मत पूछ
उस ने जिस जिस को भी जाने का कहा बैठ गया

अपना लड़ना भी मोहब्बत है तुम्हें इल्म नहीं
चीख़ती तुम रही और मेरा गला बैठ गया

उस की मर्ज़ी वो जिसे पास बिठा ले अपने
इस पे क्या लड़ना फलाँ मेरी जगह बैठ गया

बात दरियाओं की सूरज की न तेरी है यहाँ
दो क़दम जो भी मिरे साथ चला बैठ गया

बज़्म-ए-जानाँ में नशिस्तें नहीं होतीं मख़्सूस
जो भी इक बार जहाँ बैठ गया बैठ गया

एक और शख़्स छोड़कर चला गया तो क्या हुआ
हमारे साथ कौन सा ये पहली मर्तबा हुआ..!!

अज़ल से इन हथेलियों में हिज्र की लकीर थी
तुम्हारा दुःख तो जैसे मेरे हाथ में बड़ा हुआ

मेरे खिलाफ दुश्मनों की सफ़ में है वो और मैं
बहुत बुरा लगूँगा उस पर तीर खींचता हुआ..!!

मल्लाहों का ध्यान बटाकर दरिया चोरी कर लेना है,
क़तरा क़तरा करके मैंने सारा चोरी कर लेना है..!!

तुम उसको मजबूर किए रखना बातें करते रहने पर
इतनी देर में मैंने उसका लहज़ा चोरी कर लेना है..!!

आज तो मैं अपनी तस्वीर को कमरे में ही भूल आया हूँ
लेकिन उसने एक दिन मेरा बटुआ चोरी कर लेना है..!!

मेरे ख़ाक उड़ाने पर पाबन्दी आयत करने वालों
मैंने कौन सा आपके शहर का रास्ता चोरी कर लेना है..!!

tehzeeb hafi shayari in hindi

घर में भी दिल नहीं लग रहा, काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा..!!
रात के तीन बजने को हैं, यार ये कैसा महबूब है?
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा..!!

घर में भी दिल नहीं लग रहा, काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा..!!
रात के तीन बजने को हैं, यार ये कैसा महबूब है?
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा..!!

सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं, पेड़ का रूप धार लूँगा मैं..!!
रात भी तो गुजार ली मैंने, जिन्दगी भी गुजार लूंगा मैं..!!
तू निशाने पे आ भी जाए अगर कौन सा तीर मार लूँगा मैं..!!

तुझे भी अपने साथ रखता और उसे भी अपना दीवाना बना लेता
अगर मैं चाहता तो दिल में कोई ओर दरवाज़ा बना लेता..!!

मैं अपने ख्वाब पूरे कर के खुश हूँ पर ये पछतावा नही जाता
के मुस्तक़बिल बनाने से तो अच्छा था तुझे अपना बना लेता..!!

अकेला आदमी हूँ और अचानक आये हो, जो कुछ था हाजिर है
अगर तुम आने से पहले बता देते तो कुछ अच्छा बना लेता..!!

tehzeeb hafi poetry in hindi

तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है बहोत, मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उसकी आंखों के बारे में क्या जानते हो?

ये ज्योग्राफियाँ, फ़लसफ़ा, साइकोलोजी, साइंस, रियाज़ी वगैरह
ये सब जानना भी अहम है मगर उसके घर का पता जानते हो?

दोस्त किसको पता है कि वक़्त उसकी आँखों से फिर किस तरह पेश आया
हम इकट्ठे थे हंसते​ थे रोते थे एक दूसरे को बड़ा दखते थे..!!

जहन पर जोर देने से भी याद नहीं आता कि हम क्या देखते थे
सिर्फ इतना पता है कि हम आम लोगों से बिल्कुल जुदा देखते थे..!!

तब हमें अपने पुरखों से विरसे में आई हुई बद्दुआ याद आई
जब कभी अपनी आंखों के आगे तुझे शहर जाता हुआ देखते थे..!!

सच बताएं तो तेरी मोहब्बत ने खुद पर तवज्जो दिलाई हमारी
तू हमें चूमता था तो घर जाकर हम देर तक आईना देखते थे..!!

सारा दिन रेत के घर बनते हुए और गिरते हुए बीत जाता
शाम होते ही हम दूरबीनों में अपनी छतों से खुदा देखते थे..!!

उस लड़ाई में दोनों तरफ कुछ सिपाही थे जो नींद में बोलते थे
जंग टलती नहीं थी सिरों से मगर ख्वाब में फ़ाख्ता देखते थे..!!

नाजरीन यह था तहजीब हाफी की जिंदगी के बारे में आज का ब्लॉग यदि आपको आज का यह आर्टिकल पसंद आया तो इस आर्टिकल को अपने सभी दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करें इस आर्टिकल को यहाँ तक पढने और अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आपका शुर्किया अल्लाह आपको सलामत रहे यही मेरी अल्लाह से दरख्वास्त है…अल्लाह हाफिज…!!

और शायरी पढ़े 😉

 

100+ 26 January Shayari In Hindi – 100 से भी ज्यादा 26 जनवरी शायरी हिंदी में !

26 January Shayari In Hindi – क्या आप 26 January Shayari के शुभ अवसर पर 26 January के लिए शायरी खोज रहे है तो हम आपको जानकारी देना चाहेंगे की आज हम आपके लिए इस आर्टिक्ल में 100 से भी ज्यादा 26 जनवरी शायरी हिंदी में लाये है हम उनीड करते है आपको पसंद आएगी तो चलिए शुरू करते है आज का आर्टिक्ल 26 January Shayari In Hindi

So Let’s Begin,

बलिदानों का सपना जब सच हुआ तभी देश आजाद हुआ
आओ सलाम करे उन वीरों को
जिनकी शहादत से यह भारत गणतंत्र हुआ

कुछ नशा तिरंगे की आन का
कुछ नशा मातृभूमि की शान का
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा
है ये नशा हिंदुस्तान की शान का

तैरना है तो समुंदर में तैरो
नदी नालों में क्या रखा है
प्यार करना है तो वतन से करो
इन बेवफा लोगों में क्या रखा है?

दाग गुलामी का धोया है जान लुटा कर लाए हैं
कितने दीप बुझा कर मिली है यह आजादी
फिर इस आजादी को रखना होगा आज हर एक दुश्मन से  बचाकर

चलो फिर से खुद को जगाते हैं
अनुशासन का झंडा फिर घूमाते हैं
सुनहरा रंग है गणतंत्र का
ऐसे शहीदों के लिए हम सर झुकाते हैं

जमाने भर में मिलते हैं आशिक कई
जमाने भर में मिलते हैं आशिक कई
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता

Republic Day Mashup

आओ झुक कर सलाम करे उनको
जिनके हिस्से में यह मुकाम आता है
खुशनसीब होता है वो खून जो देश के काम आता है

ना मरो सनम बेवफा के लिए
2 गज जमीन नहीं मिलेगी दफन के लिए
मरना है तो मरो अपने वतन के लिए
हसीना भी दुपट्टा उतार देगी कफ़न के लिए

मैं इसका हनुमान हूं
ये देश मेरा राम है
छाती चीर के देख लो
अंदर बैठा हिंदुस्तान है

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे
बची है जो एक बूंद लहू की तब तक
भारत माता का आंचल नीलाम नहीं होने देंगे

26 January Shayari in Hindi

फना होने की इजाजत ली नहीं जाती
यह वतन की मोहब्बत जनाब पूछकर नहीं जाती

ना जियो धर्म के नाम पर
ना मरो धर्म के नाम पर
इंसानियत ही धर्म वतन का
बस जिओ वतन के नाम के नाम पर

कांटो में भी फूल खिलाए
इस धरती को स्वर्ग बनाएं
आओ सबको गले लगाएं
हम गणतंत्र का पर्व मनाए

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है जोर कितना बाजू ए कातिल में है

Republic Day Raazi

इतनी सी बात हवाओं को बताए रखना
रोशनी होगी चिरागों को जलाए रखना
लहू देखकर की जिसकी हिफाजत हमने
ऐसे तिरंगे को सदा अपनी आंखों में बसाये रखना

अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं
इश्क तो करता है हर कोई महबूब पर मरता है हर कोई
कभी वतन को महबूब बना कर कर देखो तुझ पर मरेगा हर कोई

कोई हस्ती कोई मस्ती
कोई चाह पे मरता है
कोई नफरत कोई मोहब्बत
कोई लगाव पे मरता है
ये देंश है उन दिवानों का
यहां हर बन्दा
अपने हिंदुस्तान पे मरता है
26 जनवरी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शूभकामनायें

इस दिन के लिए वीरो ने अपना खून बहाया है
झूम उठो देशवासियो गणतंत्र दिवस फिर आया है|
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

अलग है भाषा धर्म जात
और प्रांत भेष परिवेश
पर हम सब का एक ही गौरव है
राष्ट्रध्वज तिरंगा श्रेठ

तिरंगा हमारा है शान-ए-जिंदगी
वतन परस्ती है वफा-ए-जिंदगी
देश के लिए मर मिटना कबूल है हमें
अखंड भारत के स्वपन का जुनून है हमें

Republic Day Shayari in Hindi

वो शमा जो काम आये अंजुमन के लिए
वो जज्बा जो कुर्बान हो जाये वतन के लिए
रखते है हम वो हौसले भी जो मर मिटे हिंदुस्तान के लिए

Vande Mataram

वतन हमारा ऐसा कोई न छोड़ पाये
रिश्ता हमारा ऐसा कोई न तोड़ पाये
दिल एक है एक है जान हमारी
हिंदुस्तान हमारा है हम इसकी शान है

याद रखेंगे वीरो तुमको हरदम
यह बलिदान तुम्हारा है
हमको तो है जान से प्यारा यह गणतंत्र हमारा है

नफरत बुरी है ना पालो इसे
दिलों में ख़लिश है निकालों इसे
न तेरा न मेरा न इसका न उसका
ये सबका वतन है संभालो इसे

जान तो करदी हमने वतन के नाम पर
शान तो करदी हमने वतन के नाम पर
कुर्बानियों से पायी है हमने आजादी
हमारा वतन तो लाखों में एक है
आन भी करदी हमने वतन के नाम पर

नहीं सिर्फ जश्न मनाना नहीं सिर्फ झंडे लहराना
ये काफी नहीं है वतन पर यादों को नहीं भुलाना
जो कुर्बान हुए उनके लफ़्ज़ों को आगे बढ़ाना
खुदा के लिए नही ज़िन्दगी वतन के लिए लुटाना
हम लाएं है तूफ़ान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

देश भक्तो की बलिदान से
स्वतंत्रा हुए है हम
कोई पूछे कोन हो
तो गर्व से कहेंगे
भारतीय है हम

चढ़ गए जो हँसकर सूली
खाई जिन्होंने सीने पर गोली
हम उनको प्रणाम करते है
जो मिट गए देश के लिए
हम उनको सलाम करते है

आज शहीदों ने है तुमको अहले वतन ललकारा
तोड़ो गुलामी की जंजीरें बरसाओ अंगारा
हिन्दू-मुस्लिम-सिख हमारा भाई-भाई प्यारा
यह है आजादी का झंडा इसे सलाम हमारा ||
Indian Republic day 2021 की शुभकामनाये

वतन की सर बुलंदी में
हमारा नाम शामिल
गुज़रते रहना है हमको सदा
ऐसे मुकामो से जय हिन्द

Gantantra Diwas Shayari in Hindi
ना पूछो ज़माने से कि क्या हमारी कहानी है
हमारी पहचान तो बस इतनी है कि हम सब हिन्दुस्तानी हैं

तिरंगा लहराएँगे
भक्ति गीत गुनगुनाएंगे
वादा करो इस देश को
दुनिया का सबसे प्यारा देश बनाएँगे

चलो फिर से खुद को जागते है
अनुसासन का डंडा फिर घुमाते है
सुनहरा रंग है गणतंत्र का सहिदो के लहू से
ऐसे सहिदो को हम सब सर झुकाते है |
आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

वतन हमारा मिसाल मोहब्बत की
तोड़ता है दीवार नफरत की
मेरी खुश नसीबी मिली ज़िन्दगी इस चमन में
भुला न सके कोई इसकी खुशबु सातों जनम में

Republic Patriotic Mashup

नहीं सिर्फ जश्न मनाना नहीं सिर्फ झंडे लहराना
ये काफी नहीं है वतन पर यादों को नहीं भुलाना
जो कुर्बान हुए उनके लफ़्ज़ों को आगे बढ़ाना
खुदा के लिए नही ज़िन्दगी वतन के लिए लुटाना
हम लाएं है तूफ़ान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

मैं भारतवर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूँ
यहाँ की चाँदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की
तिरंगा हो कफन मेरा बस यही अरमान रखता हूँ

भारत के गणतंत्र का सारे जग में मान
दशकों से खिल रही उसकी अद्भुत शान
सब धर्मो को देकर मान रचा गया इतिहास का
इसलिए हर देशवासी को इसमें है विश्वास
गणतंत्र दिवस की ढ़ेरो शुभकामनाए

मेरा मुल्क मेरा देश मेरा
यह वतन शांति का उन्नति का
प्यार का चमन हैप्पी रिपब्लिक

वतन हमारा ऐसे ना छोड़ पाए कोई
रिश्ता हमारा ऐसे ना तोड़ पाए कोई
दिल हमारा एक है एक है हमारी जान
हिन्दुस्तान हमारा है हम है इसकी शान

आन देश की शान देश की
देश की हम संतान है
तीन रंगों से रंगा तिरंगा
अपनी ये पहचान है

चलो फिर से आज वो नजारा याद करले
चलो फिर से आज वो नजारा याद करले
शहीदों के दिलो में थी जो वो ज्वाला याद करले
जिसमे बहकर आजादी पहुची थी किनारे पे
जिसमे बहकर आजादी पहुची थी किनारे पे
देशभक्ति के खून की वो धारा याद करले

चाँद में आग हो तो अम्बर क्या करे
समान ही दुष्ठ हो तो चमन क्या करे
मुझसे मेरे तिरंगे ने रो रोकर कहा
कुर्सियां ही भर्स्ट हो तो मेरा वतन क्या करे

वतन हमारा ऐसा कोई न छोड़ पाये
रिश्ता हमारा ऐसा कोई न तोड़ पाये
दिल एक है एक है जान हमारी
हिंदुस्तान हमारा है हम इसकी शान है

आजादी का जोश कभी कम न होने देंगे
जब भी जरूरत पड़ेगी देश के लिए जान लूटा देंगे
क्योंकि भारत हमारा देश है
अब दोबारा इस पर कोई आंच न आने देंगे

वतन हमारा ऐसे न छोर पाए कोई
वतन हमारा ऐसे न छोर पाए कोई
रिश्ता हमारा ऐसा ना तोड़ पाए कोई
दिल है हमारे एक है एक है हमारी जान
दिल है हमारे एक है एक है हमारी जान
हिन्दुस्तान हमारा है हम है इसकी शान

जान तो करदी हमने वतन के नाम पर
शान तो करदी हमने वतन के नाम पर
कुर्बानियों से पाई है हमने आज़ादी
हमारा वतन तो लाखों में एक है
आन भी करदी हमने वतन के नाम पर

नहीं सिर्फ जश्न मनाना नहीं सिर्फ झंडे लहराना
ये काफी नहीं है वतन पर यादों को नहीं भुलाना
जो कुर्बान हुए उनके लफ़्ज़ों को आगे बढ़ाना
खुदा के लिए नही ज़िन्दगी वतन के लिए लुटाना
हम लाएं है तूफ़ान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

ना सरकार मेरी है
ना रौब मेरा है
ना बड़ा-सा नाम मेरा है
मुझे तो एक छोटी सी बात का गर्व है
मैं हिंदुस्तान का हूँ और हिंदुस्तान मेरा है

मेरे हर कतरे-कतरे में हिंदुस्तान लिख देना
और जब मोत हो तन पे तीरंगे का कफन देना
यही खुवाहिश खुदा हर जन्म हिंदुस्तान वतन देना
अगर देना तो दिल में देशभक्ति का चलन देना

सोचता हूँ क्या दे पाऊंगा
जो मैंने पाया है इस देश से
क्या मैं कभी चूका पाऊंगा
जो मैंने पाया है इस देश से
फैलाना है मुझे देश सम्मान की भावना
शायद इस तरह नज़र मिला पाऊंगा देश से

इंडियन होने पर करीए गर्व
मिलके मनाएं लोकतंत्र का पर्व
देश के दुश्मनों को मिलके हराओ
हर घर पर तिरंगा लहराओ

मैं तो सोया था गहरी नींद में
सरहद पर था जवान जागा रात सारी
ये सोच कर नींद मेरी उड़ गयी
जवान कर रहा रक्षा हमारी

भूख गरीबी लाचारी को
इस धरती से आज मिटायें
भारत के भारतवासी को
उसके सब अधिकार दिलायें
आओ सब मिलकर नये रूप में गणतंत्र मनायें
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

चलो करे देश का काम मिलकर
आओ बनाए देश का नाम मिलकर
देश रहे आबाद हम बने आज़ाद
बोलो वंदे मातरम साथ मिलकर

दे सलामी इस तिरंगे को
जिस से तेरी शान हैं
सर हमेशा ऊँचा रखना इसका
जब तक दिल में जान हैं
जय हिन्द जय भारत

देशभक्तों से ही देश की शान है
देशभक्तों से ही देश का मान है
हम उस देश के फूल है यारों
जिस देश का नाम हिंदुस्तान है

आज मैं आपसे अपने दिल की बात कहना चाहता हूँ
हाँ वही अलफाज जो आप सुनना चाहते है
हाँ वही तिन अलफाज जो आपके दिल को छु ले
हैप्पी रिपब्लिक डे

एक सैनिक ने क्या खूब कहा है
मैं प्यार की खुशबू को महकता छोड़ आया हूँ
इस दिल की नन्ही-सी चिड़ियाँ को चहकता छोड़ आया हूँ
मुझे अपनी छाती से तू लगा लेना ऐ भारत माँ
मैं अपनी माँ को तरसता छोड़ आया हूँ

बता दो आज इन हवायों को
जला कर रखो इन चिरागों को
लहू देकर जो ली आजादी
टूटने ना देना ऐसे प्रेम के धागों को

ये नफरत बुरी न पालो इसे
दिलों में खलिश है निकालो इसे
न तेरा न मेरा न इसका न उसका
ये वतन है हम सब का बचा लो इसे

खूब बहती हे अमन की गंगा बहने दो
मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो
लाल हरे रंग में न बाटो हमको
मेरे छत पर एक तिरंगा रहने दो

गांधी स्वपन जब सत्य बना
देश तभी जब गणतंत्र बना
आज फिर से याद करे वह मेहनत
जो थी कि वीरों ने और भारत गणतंत्र बना

गुजारिश है इन हवाओ से आज जरा तेज बहे
बात मेरे देश की शान तिरंगे को लहराने की

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिस्ताँ हमारा
ग़ुरबत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा
परबत वो सबसे ऊँचा हमसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा
गोदी में खेलती हैं जिसकी हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिसके दम से रश्क-ए-जिनाँ हमारा
ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा वो दिन है याद तुझको
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
यूनान-ओ-मिस्र-ओ- रोमा सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाकी नाम-ओ-निशाँ हमारा
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा
‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसताँ हमारा

संस्कार
संस्कृति और शान मिले
ऐसे हिन्दू
मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले

रहे हम सब ऐसे मिल-झुल कर
मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में भगवान मिले

ये नफरत बुरी है ना पालो इसे
दिलों में नफरत है निकालो इसे

ना तेरा
ना मेरा
ना इसका
ना उसका
ये सब का वतन है बचालो इसे

चलो फिर से खुद को जगाते हैं
अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं

याद करें उन शूरवीरों को क़ुरबानी
जिनके कारण हम इस लोकतंत्र का आनंद उठाते हैं

याद रखेंगे वीरो तुमको हरदम
यह बलिदान तुम्हारा है

हमको तो है जान से प्यारा यह गणतंत्र हमारा है

वतन हमारा ऐसा कोई न छोड़ पाये
रिश्ता हमारा ऐसा कोई न तोड़ पाये

दिल एक है एक है जान हमारी
हिंदुस्तान हमारा है हम इसकी शान है

सारे जहाँ से अच्छा
हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी
यह गुलिस्ताँ हमारा

दिल हमारा एक है एक है हमारी जान
हिन्दुस्तान हमारा है हम है इसकी शान

अलग है भाषा
धर्म जात
और प्रांत
भेष
परिवेश
पर हम सब का एक ही गौरव है
राष्ट्रध्वज तिरंगा श्रेठ

भूख
गरीबी
लाचारी को
इस धरती से आज मिटायें
भारत के भारतवासी को
उसके सब अधिकार दिलायें
आओ सब मिलकर नये रूप में गणतंत्र मनायें

कुछ कर गुजरने की गर तमन्ना उठती हो दिल में
भारत माँ का नाम सजाओ दुनिया की महफिल में
बलिदानों का सपना सच हुआ
देश तभी आजाद हुआ

आज सलाम करें उन वीरों को
जिनकी शहादत से ये गणतन्त्र हुआ

भारत के गणतंत्र का
सारे जग में मान
दशकों से खिल रही
उसकी अद्भुत शान

सब धर्मो को देकर मान रचा गया इतिहास का
इसलिए हर देशवासी को इसमें है विश्वास

वो शमा जो काम आये अंजुमन के लिए
वो जज्बा जो कुर्बान हो जाये वतन के लिए

रखते है हम वो हौसले भी जो
मर मिटे हिंदुस्तान के लिए
इस दिन के लिए वीरो ने अपना खून बहाया है
झूम उठो देशवासियों गणतंत्र दिवस फिर आया है

मैं तो सोया था गहरी नींद मैं
सरहद पर था जवान जगा रात सारी
ये सोच कर नींद मेरी उड़ गयी
जवान कर रहा रक्षा हमारी

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये

लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमां पर
भारत का नाम होगा सब की जुबान पर
ले लेंगे उसकी जान या दे देंगे अपनी जान
कोई जो उठाएगा आँख हमारे हिंदुस्तान पर

नहीं सिर्फ जश्न मनाना
नहीं सिर्फ झंडे लहराना
ये काफी नहीं है वतन पर
यादों को नहीं भुलाना

जो कुर्बान हुए उनके लफ़्ज़ों को आगे बढ़ाना
खुदा के लिए नही ज़िन्दगी वतन के लिए लुटाना

हम लाएं है तूफ़ान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

ना सरकार मेरी है
ना रौब मेरा है
ना बड़ा सा नाम मेरा है
मुझे तो एक छोटी सी बात का गर्व है
मैं “हिन्दुस्तान” का हूँ
और “हिन्दुस्तान” मेरा है

इंडियन होने पर करीए गर्व
मिलके मनाएं लोकतंत्र का पर्व

देश के दुश्मनों को मिलके हराओ
हर घर पर तिरंगा लहराओ

कुछ नशा तिरंगे की आन है
कुछ नशा मातृभूमि की शान का है

हम लहराएँगे हर जगह ये तिरंगा
नशा ये हिंदुस्तान की शान का है

बता दो आज इन हवाओं को
जला कर रखो इन चिरागों को

लहू देकर जो ली आजादी
टूटने ना देना ऐसे प्रेम के धागों को

राष्ट्र के लिए मान-सम्मान रहे
हर एक दिल में हिन्दुस्तान रहे

देश के लिए एक-दो तारीख नही
भारत माँ के लिए ही हर सांस रहे

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये