मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना – Rahat Indori Shayari In Hindi !

11, अगस्त 2020 का यह दिन बहुत ही दुःखद पूर्ण है क्युकी हम सब के बहुत करीबी और युवाओ के दिल पर राज करने वाले मशहूर शायर और लेखक Rahat Indori जी का निधन हो गया है Rahat Indori जी सत्तर वर्ष के थे इन्होने अपने बीते समय में बहुत सारे मुशायरो की शोभा को बढाने के साथ-2 कई बॉलीवुड मूवीज के लिए गाने भी लिखे है और कुछ किताबे भी पब्लिश की है बीते कुछ समय में Rahat Indori Shayari के बहुत बड़े शायर या यु कहो उस्ताद रहे है 

Rahat Indori जी का अपना ही एक अलग अंदाज था जब भी वह मंच पर शायरी करते तो शायरी के पहले लाइन में माइक के पास जाना और दूसरी लाइन में माइक से दूर जाना थोडा अजीब लगता है पर एक असरदार माहौल बनाना बहुत खूब जानते थे शेर ओ शायरी करते समय Rahat Indori जी मंच के सामने मौजूद लोगों से खूब मजाक भी किया करते थे यह उनके लिए सिर्फ उनके बाए हाथ का काम रहा है लेकिन इन् तमाम खूबियों के बीच उनके शेर अपनी रगत में हमेशा बने रहे है..!

इसलिए आज हम उनकी याद में उनके लिखे चंद यादगार शेर आपके लिए लेकर आये है जिन्हें आप अब पढ़ सकते है Rahat Indori Shayari In Hindi पर जाए..!

Rahat Indori Shayari, Rahat Indori Sher पढ़े 😉 

 मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना

जनाज़े पर मेरे लिख देना यारो मोहब्बत करने वाला जा रहा है

हम ही बुनियाद का पत्थर हैं लेकिन हमें घर से निकाला जा रहा है

 एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तों दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

 शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

 ये ज़िंदगी जो मुझे क़र्ज़-दार करती रही कहीं अकेले में मिल जाए तो हिसाब करूँ

 हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

 दोस्ती जब किसी से की जाए दुश्मनों की भी राय ली जाए

 आंख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

 मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमां लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो

 ये बूढ़ी क़ब्रें तुम्हें कुछ नहीं बताएँगी मुझे तलाश करो दोस्तो यहीं हूँ मैं

 अब ना मैं हूँ ना बाक़ी हैं ज़माने मेरे,फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे

 बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए

 लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूं हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूं हैं

 मैं ताज हूं तो ताज को सर पर सजाएँ लोग मैं ख़ाक हूं तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए

 अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझ को वहाँ पे ढूँढ रहे हैं जहां नहीं हूँ मैं

 बादशाहों से भी फेंके हुए सिक्के न लिए हम ने ख़ैरात भी माँगी है तो ख़ुद्दारी से

 ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था

 हों लाख ज़ुल्म मगर बद-दुआ’ नहीं देंगे ज़मीन माँ है ज़मीं को दग़ा नहीं देंगे

 वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया

 अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब है लोगों ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया

 सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है

 अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

 दो गज सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है,ऐ मौत तूने मुझको जमींदार कर दिया

 मैं जानता हूं दुश्मन भी कम नहीं,लेकिन हमारी तरह हथेली पर जान थोड़ी है

 किसने दस्तक दी, कौन है आप तो अंदर है बाहर कौन है

Let’s wrap it,

हम आशा करते है आपको Rahat Indori Shayari पर ये पोस्ट पसंद आया होगा अगर आपको यह पोस्ट अच्छा लगा तो इस आर्टिकल को आप सोशल मीडिया अकाउंट पर अपने सभी दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है

और शायरी पढ़े 😉