तू भी खामख्वाह बढ़ रही है ए धूप – Too Bhee Khaamakhvaah Badh Rahee Hai E Dhoop !

तू भी खामख्वाह बढ़ रही है ए धूप,
इस शहर में पिघलने वाले दिल ही नहीं हैं…!

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